At 36,000 feet, Air India flight to Delhi briefly lost all hydraulics within seconds, triggering ‘altitude upset’

2 hours ago  ·  1 min read
By William Rodriguez - bdbusinessdaily.com
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36,000 फीट पर एयर इंडिया का हाइड्रोलिक संकट

Bdbusinessdaily.com – 4 अगस्त को दिल्ली की ओर उड़ान भर रहे एक एयरबस A320neo (पंजीकरण VT-EXO) ने क्रूज़ ऊँचाई पर कुछ ही सेकंडों में तीनों हाइड्रोलिक सर्किट खो दिए। At 36 000 feet Air India विमान ने अचानक 372 फीट ऊपर उछाला और फिर 292 फीट नीचे गिरा, जिससे 24 यात्रियों और क्रू को चोटें लगीं। विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (AAIB) की 4 सितंबर को जारी प्रारंभिक रिपोर्ट ने इस घटना की सेकंड-दर-सेकंड समय-रेखा प्रकाशित की है, परंतु हाइड्रोलिक फेलियर की मूल तकनीकी वजह अभी अनिर्धारित है।

उड़ान की पहचान और घटना की क्रमिकता

उड़ान AI 2379 थी, जिस पर 137 यात्री (तीन शिशु सहित), छह कैबिन क्रू और दो फ्लाइट क्रू — कुल 145 लोग — सवार थे। विमान ने 1.41 बजे UTC (7.11 बजे IST) पर उड़ान भरी थी और टेक-ऑफ के समय कोई असामान्यता दर्ज नहीं हुई। समयानुसार 9.32 बजे IST के 43वें सेकंड पर, जब 36,000 फीट पर एयर इंडिया विमान क्रूज़ कर रहा था, फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम ने ग्रीन सर्किट के नुकसान का संकेत दिया। चार सेकंड बाद ब्लू और येलो सर्किट भी बंद हो गए। 9.32:48 IST पर ऑटोपायलट अलग हुआ, लगातार दोहराव वाला चिम् सक्रिय हुआ, और तीन सेकंड बाद स्टॉल वॉर्निंग दो सेकंड के लिए ट्रिगर हुई।

AAIB रिपोर्ट के अनुसार इस अचानक गति ने बिना बेल्ट बाँधे बैठे यात्रियों को ओवरहेड बिन और सीलिंग पैनलों से टकरा दिया। क्रूज़ ऊँचाई पर सीट-बेल्ट संकेत आमतौर पर बंद रहते हैं, इसलिए अधिकांश यात्री उस क्षण में अनबेल्टेड थे।

सिस्टम रिकवरी और पायलट प्रतिक्रिया

मिनटों के भीतर ही हाइड्रोलिक सर्किट वापस सक्रिय हो गए। लगभग 04:02:52 UTC (9:32:52 IST) पर ब्लू सर्किट रिकवर हुआ और कुछ सेकंडों बाद येलो व ग्रीन भी लौट आए। फ्लाइट-कंट्रोल सतहें पुनः संचालित हुईं और विमान सामान्य परिचालन में लौट आया। को-पायलट (पायलट-फ्लाईंग) ने स्थिति का प्रारंभिक प्रबंधन किया, जबकि पायलट-इन-कमांड ने नियंत्रण संभालने से पहले मूल्यांकन किया।

एक्स-ड्रीमलाइनर पायलट कैप्टन शरत पणिकर ने बताया कि घटना की क्रमिकता ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट के समय इलेवेटरों के भिन्न-भिन्न स्थानों पर बैठे रहने के अनुरूप है।

“ऑटोपायलट ट्रिपिंग ट्रिपल (पूर्ण) हाइड्रोलिक फेलियर का स्वाभाविक परिणाम है। साइडस्टिक पर पहली बार आगे धकेलने पर विमान ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी — सिस्टम रीसेट हो रहा था। दूसरी बार कठोर आंदोलन ने नेगेटिव-जी मैनवुवर उत्पन्न किया, जिससे सभी अनबकल्ड यात्री और क्रू सीलिंग से टकराए।” — कैप्टन पणिकर

उन्होंने जोड़ा: “चार सेकंड के भीतर तीनों सर्किट के बंद होने की वजह जाँच एजेंसी को निर्धारित करनी होगी। एक बार तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम फेल हो जाएँ, तो कंट्रोल सतहों तक शक्ति का कोई स्रोत नहीं बचता।”

मनोसक्रिय पदार्थ जाँच और अनुत्तरित प्रश्न

प्रारंभिक रिपोर्ट में एक अलग बिंदु उठाया गया: दिल्ली में उतरने के बाद की गई पुष्टिकर्ता परीक्षण में पायलट-इन-कमांड ने मनोसक्रिय पदार्थ के लिए “नॉन-नेगेटिव” रिपोर्ट दी, जबकि को-पायलट ने दोनों परीक्षणों में नेगेटिव रिपोर्ट दी। AAIB ने स्पष्ट रूप से कहा कि मनोसक्रिय पदार्थ की खोज और इस घटना के बीच कोई संबंध स्थापित नहीं किया गया।

एक अन्य पूर्व पायलट (नाम न लेने की शर्त पर) ने कहा कि एयरबस क्रू को ट्रिपल हाइड्रोलिक फेलियर के लिए प्रशिक्षित नहीं करती, क्योंकि यह परिदृश्य ट्रेनिंग सिनेरियो में शामिल नहीं है।

“जो प्रश्न अभी भी अनुत्तरित हैं, वे हैं कि हाइड्रोलिक फेलियर की वास्तविक वजह क्या थी और तीनों सिस्टम इतनी तेज़ी से कैसे बंद हुए। जब इतने चिकित्सा आपातकाल हैं, तो कोलकाता या भुवनेश्वर क्यों नहीं जाते?”

एक तीसरे पूर्व पायलट ने टिप्पणी की कि रिपोर्ट उत्तरों से अधिक प्रश्न उठाती है और संभावित कारण या योगदान कारक स्थापित नहीं करती। तकनीकी और अन्य पहलुओं की विस्तृत जाँच जारी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हाइड्रोलिक सिस्टम क्या है और यह विमान को कैसे चलाता है?

आधुनिक यात्री विमानों में फ्लाइट-कंट्रोल सतहें — इलेवेटर, एलेरन और रूडर — हाइड्रोलिक दबाव द्वारा संचालित होती हैं। एयरबस A320 परिवार में तीन स्वतंत्र सर्किट (ग्रीन, ब्लू, येलो) होते हैं, ताकि एक सर्किट के फेल होने पर बाकी दो नियंत्रण बनाए रख सकें। तीनों एक साथ बंद होने पर कंट्रोल सतहों तक शक्ति का कोई स्रोत नहीं बचता।

यह घटना यात्रियों के लिए कितनी खतरनाक थी?

36,000 फीट पर क्रूज़ के दौरान अचानक 372 फीट का ऊपर-नीचे झटका ने अनबेल्टेड यात्रियों को सीलिंग से टकरा दिया। 24 लोगों को चोटें लगीं, परंतु कोई जानी-मानी घटना नहीं हुई। विमान कुछ मिनटों में सामान्य परिचालन में लौट आया और दिल्ली में सुरक्षित उतरा।

AAIB की अंतिम रिपोर्ट कब आने की उम्मीद है?

प्रारंभिक रिपोर्ट 4 सितंबर को जारी हुई है। अंतिम रिपोर्ट में हाइड्रोलिक फेलियर की मूल वजह, योगदान कारक और सिफारिशें शामिल होंगी। जाँच एजेंसी ने बताया कि तकनीकी और अन्य पहलुओं की विस्तृत जाँच अभी जारी है; अंतिम रिपोर्ट की समय-सीमा AAIB की मानक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

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