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जमात के अमीर ने बीएनपी पर लगाए गंभीर आरोप
संसद में विपक्ष के नेता तथा बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के अमीर डॉ शफीकुर रहमान ने आज 2 अगस्त को बीएनपी पर भारी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीएनपी उसी प्रकार की स्वैराज्यवादी नीतियों को अपना रही है, जो पहले जमात और अन्य विपक्षी दलों को झेलनी पड़ी थीं।
जुलाई आंदोलन के बाद की स्थिति
बांग्लादेश लेबर पार्टी द्वारा जतिया प्रेस क्लब में आयोजित “जन देबो, जुलाई देबो ना” विषयक चर्चा में शफीकुर रहमान ने कहा कि जुलाई आंदोलन से पहले जमात और बीएनपी दोनों ही दलों को सत्रह वर्षों से अधिक समय तक दमन सहना पड़ा।
रक्त से सने इस आंदोलन के बाद हमें वही चीज़ें देखने को मिल रही हैं, जो फासीवादी लोग करते थे। यह एक फोटोकॉपी जैसा ही है।
उन्होंने बीएनपी पर आरोप लगाया कि वह विरोध को दबाने के लिए प्रचार, षड्यंत्र और बल का उपयोग कर रही है। साथ ही उन्होंने बीएनपी के संदर्भ पर भी सवाल उठाए।
लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया
शफीकुर रहमान ने 1971 की मुक्ति युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि यह युद्ध भेदभाव और लोगों के मताधिकार को छीनने के खिलाफ था। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी ही गलतियाँ दोहराने के गंभीर परिणाम होंगे।
उन्होंने लोक प्रशासन में बढ़ती राजनीतिकरण और पक्षपाती नियुक्तियों पर भी प्रहार किया। साथ ही उन्होंने गैर-राजनीतिक चुनावी प्रशासन की मांग की ताकि विश्वसनीय चुनाव हो सकें।
सरकार को चाहिए कि वह ऐसे चुनाव कराए जो वास्तव में लोगों के मताधिकार को प्रतिबिंबित करें।
शफीकुर रहमान ने विपक्षी कार्यकर्ताओं पर लगाए जा रहे राजनीतिक रूप से प्रेरित मामलों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं की भी आलोचना की।
अतिथि वक्ता
इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय नागरिक पार्टी के मुख्य समन्वयक नासिरुद्दीन पाटवारी, लीबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) ओली अहमद और लेबर पार्टी के अध्यक्ष मोस्टफिजुर रहमान इरान ने भी भाग लिया।
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